खरी – अखरी

               _बन गया इतिहास_

इतिहास में यह भी लिख गया कि भारत में जब कोरोना महामारी से लोग मर रहे थे, महामारी से संक्रमितों की जान बचाने में खुद चिकित्सा कर्मी शहीद हो रहे थे, पुलिसकर्मी अपने प्राण निछावर कर रहे थे, नागरिकों को आतंकियों से मुक्त कराने में सैनिक शहीद हो रहे थे तब भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सुरक्षा और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने के बजाय धरा पर जनता से ताली – थाली बजवा रहे थे, दिया – मोमबत्ती जलवा रहे थे, सैनिकों को गगन में भेजकर पुष्प वर्षा करवा रहे थे ।

             _देश में भी बंशी बजी_

रोम जल रहा था और नीरो बंसी बजा रहा था । ये कितना सही है । इतिहासकार ही बता सकते हैं । मगर इसी तरह का नजारा अपने देश भारत में पिछले 40 दिनों में 3 बार तो देखने को मिला है ।

                 _काल का गाल_

कोविड 19 कोरोना वायरस रूपी महामारी से पूरा देश जूझ रहा है । डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल वर्कर्स बिना सुरक्षा तथा चिकित्सा उपकरणों के अपनी जान जोखिम में डालकर संक्रमितों का इलाज करने में लगे हैं । न जाने कितने होनहार डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल वर्कर्स बिना सुरक्षा उपकरणों के अभाव में खुद भी संक्रमित हो गए । कुछ तो काल के गाल में समा गए ।

         _चालीसवाँ भी हो गया_

इसी तरह मैदानी व्यवस्था सम्हाल रहे पुलिस कर्मियों को भी अपनी जान गवांनी पड़ रही है । कोरोना महामारी की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हुए मीडिया कर्मियों को भी संक्रमण का सामना करना पड़ रहा है । तालाबंदी के दो चरण पूरे हो गए । इन दो चरणों की समय सीमा 40 दिनों में भी सरकार पर्याप्त मात्रा में न तो सुरक्षा उपकरणों का इंतजाम कर सकी न ही चिकित्सा उपकरणों का ।

              _उपरांत पुष्प वर्षा_

इन चालीस दिनों में सरकार प्रमुख ने विदूषकों की माफिक कभी देशवासियों से ताली थाली पिटवाई तो कभी दिया मोमबत्ती जलवाई । तालाबंदी के दूसरे चरण के अंतिम दिन तो सरकार प्रमुख ने अपनी विदूषकीय महत्वाकांक्षा पूर्ति में सेना को ही झोंक दिया । देशभर में कोरोना महामारी तांडव नृत्य कर रही है । लोग सुरक्षा और चिकित्सा उपकरणों के अभाव में दम तोड़ रहे हैं और हमारे सरकार प्रमुख सेना से फूलों की वर्षा करवा रहे हैं । अभी कौन हमने जंग जीत ली है ।

           _इससे बढ़ेगा उत्साह !_

डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ, पुलिसकर्मियों को सुरक्षा किट की आवश्यकता है । इससे उनका उत्साह बढ़ेगा न कि ताली, थाली बजवाने से, दिया मोमबत्ती जलवाने से, फूल बरसाने से । ये तो वही हुआ कि आदमी भूख से मर रहा है और आप उसे गीता ज्ञान दिए जा रहे हो ।

        _चालीस बाद चालीस पार_

एक तरफ फूल बरसाये जा रहे हैं दूसरी तरफ संक्रमितों का आंकड़ा नए 2800 संक्रमित मिलकर आंकड़े को 40 हजार के पार पहुंचा रहा है । फूल बरसाने के बीच एक सैकड़ा संक्रमितों ने अलबिदा कह दिया ।

            _जमा - माफ - डाका_

एक तरफ सरकार कोरोना से लड़ने के लिए अरबों रुपए बतौर चंदा बटोर चुके हैं । इसके बाद भी पैसों का रोना रोया जा रहा है । दूसरी तरफ चंद धन्नासेठों की गरीबी दूर करने के लिए अरबों रुपये के कर्ज की रकम को डूबंत खाते में डालकर माफ किये जा रहे हैं तो तीसरी तरफ खुद को महिमामण्डित करने के लिए सरकार की तिजोरी में डाका डाला जा रहा है ।

              _भुगतना तो पड़ेगा_

कितना अच्छा होता कि जिन रुपयों की होली फूल बरसाने में जलाई गई है उतने रुपयों के सुरक्षा और चिकित्सा उपकरण खरीद कर सामाजिक सैनिकों (डॉक्टरों, नर्सों) को दे दिये गए होते तो यही उनकी हौसला अफजाई का सबसे बड़ा काम होता । मगर ऐसा नहीं हो सका । धन्य है सरकार प्रमुख और उनकी सोच । देश में व्याप्त राजनीतिक शून्यता का खामियाजा देशवासियों को आखिरकार भुगतना तो पड़ेगा ही ।

              _घटिया हरकत_

अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने के लिए शौर्यवीरों को भी लाईन में खड़ा कर दिया गया । एक ओर शौर्यवीर फूल बरसा रहे थे तो दूसरी ओर कश्मीर में आतंकियों से नागरिकों को मुक्त कराने में सेना के कमांडिंग अफसर और मेजर सहित 5 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए । इससे घृणित तरीका और क्या होगा ।

अश्वनी बड़गैंया, अधिवक्ता
स्वतंत्र पत्रकार

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