राहुलशर्मा :- AP स्ट्रेन पर एक्सपर्ट का दावा:कोरोना संक्रमण में N440K स्ट्रेन 5% से भी कम, जल्द गायब हो जाएगा; नहीं है 15 गुना ज्यादा खतरनाक

आंध्र प्रदेश में सामने आए जिस कोरोना वैरिएंट को लेकर गंभीर चिंताएं जाहिर की जा रही थीं, उस पर एक्सपर्ट ने अब नया दावा किया है। हैदराबाद के सेंटर फॉर सेलुलर एंड माइक्रो बायोलॉजी (CCMB) ने आंध्र में किसी नए और खास कोरोना वैरिएंट के फैलने की खबरों को खारिज कर दिया है। संस्थान ने कहा कि आंध्र के जिस N440K स्ट्रेन की बात चल रही है, वो पूरे कोरोना संक्रमण में 5% से भी कम पाया गया है।

द प्रिंट से बातचीत में CCMB के डायरेक्ट राकेश मिश्रा ने कहा कि संभावना है कि ये स्ट्रेन जल्द ही गायब हो जाएगा या फिर दूसरे वैरिएंट इसकी जगह ले लेंगे।

लैब रिपोर्ट पर CCDM की सफाई
मिश्रा ने साफ तौर पर इस बात से इनकार किया कि N440K के 15 गुना ज्यादा खतरनाक होने की बात गलत है। उन्होंने एक लैब रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि N440K तेजी से बढ़ता और फैलता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि ये इंसानों के लिए ज्यादा खतरनाक भी है। हमने अपनी रिपोर्ट में ये कहा था कि इस वैरिएंट के बढ़ने की प्रकृति 10-15 गुना ज्यादा पाई गई। लेकिन, हमने इसे एनिमल सेल में इस वैरिएंट को डेवलप किया था। लेकिन, इंसानों के पास अलग सिस्टम है। उनके पास इम्यून सिस्टम भी है। इसके अलावा दूसरे कारण भी प्रभावी रहते हैं। संक्रमण का अंदाजा लैब में डेवलप किए गए वैरिएंट के प्रभाव से नहीं लगाया जा सकता है।

CCBM ने ही पहली बार किया था N440K का जिक्र
उन्होंने आगे कहा कि विशाखापट्टनम में ऐसा कोई खास स्ट्रेन नहीं आया है। ऐसा भी कोई स्ट्रेन अस्तित्व में नहीं है, जिसे दूसरे स्ट्रेन से ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है। जहां तक N440K स्ट्रेन की बात है तो इसका म्यूटेशन भी दुनिया के दूसरी जगहों पर मिले वैरिएंट के म्यूटेशन जैसा ही है। CCMB ने ही फरवरी में कहा था कि इस बात के सबूत मिल रहे हैं कि दक्षिणी राज्यों में N440K स्ट्रेन के फैलने के सबूत मिल रहे हैं और इसके संक्रमण को समझने के लिए इस पर करीबी नजर रखना जरूरी है।

UK और डबल म्युटेंट से तुलना नहीं
स्टडी में N440K स्ट्रेन की तुलना UK और डबल म्युटेंट से नहीं की गई है। इस स्ट्रेन की तुलना इसके ही पुराने स्ट्रेन से की गई है। एन नए स्ट्रेन के साथ भी इसे कम्पेयर किया गया, लेकिन वह स्ट्रेन हमारे देश से लगभग खत्म हो गया है। स्टडी में ये कहीं भी नहीं कहा गया है कि N440K स्ट्रेन UK स्ट्रेन और डबल म्युटेंट से ज्यादा खतरनाक है। आंध्र मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और विशाखापट्टनम के कोविड-19 स्पेशल ऑफिसर डॉ. पी वी सुधाकर ने बताया कि ये वैरिएंट कितना खतरनाक है फिलहाल ये पता करने का कोई तरीका नहीं है। इसे मेडिकली ऑब्जर्व करने के बाद कुछ डिटेल मिली हैं, लेकिन इसके आधार पर यह नहीं कहा जा सकता है कि वैरिएंट ज्यादा खतरनाक है। हालांकि, हमने ये देखा है कि संक्रमितों में इसका असर तेजी से दिखाई देता है। उन्हें दो दिनों के अंदर ही सांस लेने में तकलीफ महसूस होने लगती है।

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